कुम्भ मेला क्या है ?
हिन्दू धर्म का ऐसा धार्मिक आयोजन है जिसमे करोडो साधू, संत एवं भक्त कुम्भ स्थान – प्रयागराज, उज्जैन, नासिक एवं हरिद्वार में निर्धारित तिथि पर एकत्र हो कर पूर्ण विधि विधान से स्नान कर साधना एवं पूजा करते है I यह आयोजन या मेला हिन्दू धर्मं में बहुत महत्व रखता है I


कुम्भ मेला कब मनाया जाता है ?
हिन्दू ज्योतिष गणनाओ के अधार पर यह आयोजन पौष पूर्णिमा को शुरु होता है मकर सक्रांति इसका एक बहुत विशेष पर्व हैं मकर सक्रांति के दिन किये गये स्नान को कुम्भ स्न्नान योग कहते है I
कुम्भ की पोराणिक कथा –
कुम्भ का शाब्दिक अर्थ है कलश या घड़ा होता है कथा के अनुसार देव और दैत्यों में आपसी सहमती से जब समुन्द्र मंथन हुआ था तो उसमे से अमृत कलश की प्राप्ति हुई उसके उपरांत देवताओ के आज्ञा पर इंद्र के पुत्र जयंत उस अमृत कलश को ले कर आकाश में भागने लगे तब दैत्यों द्वारा उकना पीछा किया गया दैत्यों के द्वारा अथक प्रयाश के बाद दैत्यों और जयंत के बिच में छिना झपटी और युद्ध हुआ यह युद्ध 12 दिन तक चला इस युद्ध के दौरान कलश से अमृत की कुछ बुँदे पृथ्वी के चार जगहों पर गिरा जो स्थान – प्रयागराज, उज्जैन, नासिक एवं हरिद्वार है I देवताओ का 12 दिन मनुष्य के 12 वर्ष के बराबर होता है अतः कुम्भ प्रत्येक 12 वर्ष पर होता है

प्रयागराज में कुम्भ मेले का महत्व –
माना जाता है कि प्रयागराज में त्रिवेणी है अर्थात यहाँ 3 नदियों का समागम या संगम है गंगा, यमुना एवं सरस्वती नहीं जोकि भूमि के निचे से बहती हुई आके प्रयागराज में मिलती है और संगम होता है I प्रयागराज में कुम्भ से पहले नदियों का घाट या किनारा होता है किन्तु जब कुम्भ होना होता हैं तो वहा पूरा एक शहर बस जाता है जोकि बहुत वृहम दृश्य होता है I यह देश के हरेक कोने से विभिन्न प्रकार के साधू इस स्न्नान में अपनी साधना कर के जीवन मरण से मोक्ष प्राप्त करते हैं

2025 का महाकुम्भ विशेष क्यों ?
जब 11 बर्ष का पूर्ण कुम्भ होता है तब 12 पूर्ण कुम्भ विशेष होता है क्यू की यह 144 वर्षो बाद आता है यह कुम्भ 12 जनवरी 2025 से शुरू होकर 26 फ़रवरी 2025 को समाप्त होगा